NCERT की कक्षा 9 की नई किताब में बड़ा बदलाव, ‘आपातकाल’ पर नया अध्याय; प्रस्तावना और ‘धर्मनिरपेक्षता’ के संदर्भ हटे
नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान (Social Science) की किताब में कई बड़े बदलाव किए हैं। नई पुस्तक में पहली बार 1975-77 के आपातकाल (Emergency) पर विस्तृत अध्याय जोड़ा गया है। वहीं, संविधान की प्रस्तावना (Preamble) और ‘धर्मनिरपेक्ष’ (Secular) व ‘धर्मनिरपेक्षता’ (Secularism) से जुड़े संदर्भ मुख्य पाठ से हटा दिए गए हैं। इन बदलावों को लेकर देशभर में राजनीतिक और शैक्षणिक बहस शुरू हो गई है।
नई किताब में क्या-क्या बदला?
NEP 2020 के तहत तैयार की गई नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक “Understanding Society: India and Beyond” में इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र को एकीकृत किया गया है। नई किताब में संविधान की प्रस्तावना को पहले की तरह शामिल नहीं किया गया है, जबकि ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘धर्मनिरपेक्षता’ शब्दों के उल्लेख भी मुख्य पाठ से हटा दिए गए हैं।
पहली बार जोड़ा गया आपातकाल का अध्याय
नई पुस्तक में 1975 से 1977 के दौरान लागू आपातकाल पर अलग से अध्याय दिया गया है। इसमें बताया गया है कि उस दौरान मौलिक अधिकारों पर असर पड़ा, प्रेस सेंसरशिप लागू हुई और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हुई।
चुनाव आयोग और मतदाता सूची पर भी नया फोकस
संशोधित पाठ्यपुस्तक में भारत निर्वाचन आयोग, मतदाता सूची (Electoral Roll) और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी को भी नए तरीके से शामिल किया गया है, ताकि छात्रों को लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली बेहतर ढंग से समझाई जा सके।
क्यों छिड़ा विवाद?
नई किताब के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आपातकाल पर अध्याय शामिल किए जाने का समर्थन किया है। वहीं, कांग्रेस और कुछ शिक्षा विशेषज्ञों ने प्रस्तावना तथा ‘धर्मनिरपेक्षता’ से जुड़े संदर्भ हटाने पर सवाल उठाए हैं।
NCERT ने क्या कहा?
नई पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) के तहत तैयार की गई है। NCERT का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों को भारतीय लोकतंत्र, संविधान और शासन व्यवस्था को नए दृष्टिकोण से समझाना है।
निष्कर्ष
NCERT की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में किए गए बदलावों ने शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में नई बहस छेड़ दी है। आपातकाल पर नया अध्याय जोड़ने और प्रस्तावना व ‘धर्मनिरपेक्षता’ से जुड़े संदर्भ हटाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
